मत पीसो इस चक्की में, मैं भी इंसान हूँ, हाँ, मैं भी इंसान हूँ। मत पीसो इस चक्की में, मैं भी इंसान हूँ, हाँ, मैं भी इंसान हूँ।
पिसती रही समय की चक्की में, बनती रही और निखरती रही पिसती रही समय की चक्की में, बनती रही और निखरती रही
कृष्ण तुम.... प्रेम की अमिट आस हो। कृष्ण तुम... प्रेम की अमर प्यास हो। कृष्ण तुम.... प्रेम की अमिट आस हो। कृष्ण तुम... प्रेम की अमर प्यास हो।
कहीं मिल जायेंं तो मुझे भी बताना मैं भी तो माँग रही हूँ। कहीं मिल जायेंं तो मुझे भी बताना मैं भी तो माँग रही हूँ।
पत्तियों की सरसराहट वन में पंछियों के साथ मिलकर गाती सन्नाटा रात का दूर भगाकर दिलों में अपनी जगह ... पत्तियों की सरसराहट वन में पंछियों के साथ मिलकर गाती सन्नाटा रात का दूर भगाकर ...
इस कथा में आत्मा बसी जहान की क्यों राम जी से दूर जा रही है जानकी। इस कथा में आत्मा बसी जहान की क्यों राम जी से दूर जा रही है जानकी।